What is Ayurveda in Hindi | आयुर्वेद क्या है

आयुर्वेद क्या है | what is ayurveda in hindi

संसार का सबसे प्राचीन चिकित्सा शास्त्र है | स्वास्थ्य सम्बन्धी आयुर्वेद है | यह आयुर्वेद में दीर्घायुष्य व चिकित्सा सम्बन्धी सबसे जायदा बाते मिलती हैं |

आयुर्वेद क्या है What is ayurveda
आयुर्वेद क्या है  What is ayurveda 

आयुर्वेद की परम्पराएँ

आयुर्वेद सबसे पहले ब्रम्हा ने, ब्रम्हा से प्रजापति ने अध्ययन किया | प्रजापति से अश्विनीकुमारों ने अध्ययन किया| इनसे इंद्र ने और इंद्र से भारद्वाज ऋषि ने अध्ययन किया | इसके बाद धन्वन्तरि ने अध्ययन करके अनेक ऋषियों को आयुर्वेद के बारे में पढाया और बताया |

जिनमें पुनर्वसु फिरआत्रेय मुनि जी ने फिर अग्निवेशजी ने और इसके बाद भेल जतुकर्ण, पराशर, हारित, क्षारपाणी, सुश्रुत आदि के नाम मुख्यरूप से हैं |

आयुर्वेद सभी सुखों का साधन है

शरीर माध्यम खलु धर्मं साधनं

शरीर स्वस्थ और निरोग हो तभी व्यक्ति दिनचर्या का पालन कर सकता है | प्रतिदिन कार्य और काम कर सकता है | क्या आप जानते हैं आयुर्वेद किस सिद्धांत पर कार्य करता है |

आयुर्वेद औषधि और योग चिकित्सा से भी अधिक भोजन, कब कितन क्या खाना चाहिए क्या नहीं खाना चाहिए | (पथ्य-अपथ्य) दोनों ही के बारे में कहता है | |

आयुर्वेद में रोग होने पर रोगों के कारणों को दूर करना है | किसी व्यक्ति को रोग होने पर उसका इलाज आयुर्वेद से होता है तो सबसे पहले उस रोग के कारणों को दूर किया जाता है फिर उसका उचार किया जाता है |

आयुर्वेद के अनुसार जीवन के तीन आधार हैं |

1.आहार

2.निद्रा

3.ब्रम्हचर्य

1) आहार – आहार से व्यक्ति के शरीर का निर्माण होता है और मन भी आहार से ही प्रभावित होता है |

आहार शुद्धि से सत्व शुद्ध होता है | सत्व शुद्धि से स्मृति स्थिर होती है और स्मृति के स्थिर होने से ग्रंथि भेदन होकर सुख प्राप्त होता है |

इसलिए आहार शुद्ध सात्विक, पोष्टिक, शरीर को उर्जा देनेवाला होना चाहिए | रोगों से बचाने वाला होना चाहिए |

2) निद्रा – सामान्य व्यक्ति के लिए निद्रा उतनी ही आवश्यक है जितना की भोजन | स्वस्थ व्यक्ति के लिए 6 घंटे शयन करना पयाप्त है बच्चों के लिए 8 घंटे शयन  करना पर्याप्त है | जैसे-जैसे योगमय जीवन व्यतीत करता है निद्रा और आहार दोनों ही सीमित हो जाते हैं | साधक ध्यान की उच्च अवस्था को प्राप्त करता है | उर्जा निद्रा से प्राप्त हो रही है | वाही उर्जा ध्यान से प्राप्त होने लगती है |

प्रकृति का नियम है सायंकाल होने पर सभी पशु-पक्षी अपने अपने आश्रय स्थल पर विश्राम के लये लौट आते हैं |

जैसे ही ब्रम्हा मुहर्त का समय होता है पक्षी चहकने लगते है | वे मनो प्रभु का गुणगान कर रहे हों | परन्तु दुर्भाग्य शाली मानव न तो  ठीक समय पर शयन ही करता है और न ही प्रातःकाल ठीक समय पर उठता है जिससे तन मन दोनों ही अस्वस्थ हो जाते हैं |

ठीक समय पर सायन और ठीक समय पर जागरण से मनुष्य स्वस्थ, धनवान बलवान एवं बुद्धिमान होता है |

3) ब्रम्हचर्य – विषयों का विचार करने से उन विषयों के संग करने की इच्छा व  उनकी पूर्ती की कामना जाग्रत होती है और उस संग से कम की इच्छा जाग्रत हो जाती है |

इससे स्पस्ट है की ऐसा साहित्य न पढ़ें, ऐसा द्रश्य न देखें, ऐसी बातें न सुने और ऐसा विचार भी न करें जो कामवर्धक एवं उत्तेजक हो | हम सोचते है की भोग को हमने भोग लिया है | परन्तु ऐसा नहीं है, भोग ही हमें भोगकर जीर्णता की ओर ले जा रहे हैं | काल का अंत नहीं होता, हम ही काल के गाल में समा जाते हैं |  

आयुर्वेद सम्पूर्ण जीवन शास्त्र है

आयुर्वेद मानव जीवन का शास्त्र है | इसमें आतुर (रोगी) को स्वस्थ करने के लिए औषधियों का वर्णन है तो स्वस्थ व्यक्ति की स्वास्थ्य रक्षा के लिए दिनचर्या और ऋतुचर्या का वर्णन है|

जिसमें वात, पित्त, कफदोषों के आधार पर उचित और हितकारी आहार-विहार का विस्तृत विवरण सम्मिलित है | परस्पर विरोधी एवं सर्वथा असेवनीय पदार्थों का वर्णन है तथा धारण न करने योग्य वेगों का विस्तार से बताया गया है | आयुर्वेद के आयाम इतने बड़े है, इसे किसी सीमा में बाधा नहीं जा सकता है |   

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