
रंगीन थाली, लंबी जिंदगी: एंटीऑक्सीडेंट फूड का पूरा सच
आपने कभी सोचा है की प्रकृति ने फलों और सब्जियों को इतने सारे रंग में क्यों दिए? लाल टमाटर, नीली ब्लूबेरी, हर पलक, नारंगी गाजर- यह सब सिर्फ देखने में सुंदर नहीं है, बल्कि में छुपा है आपकी सेहत का राज | विज्ञान की भाषा में इन्हें एंटीऑक्सीडेंट रिच फूड कहते हैं और आज हम आपको इनके बारे में जो सब बताएंगे जो शायद अब तक आपने नहीं जानते थे |
आखिर क्या होते हैं फ्री रेडिकल्स?
हमारे शरीर की हर कोशिका सांस लेते हैं- ऑक्सीजन लेती है और ऊर्जा बनती है | लेकिन इस प्रक्रिया में कुछ आवारा इलेक्ट्रॉन निकलते हैं, जिन्हें फ्री रेडिकल्स कहते हैं | यह अस्थिर कण शरीर की कोशिकाओं, उनके डीएनए और प्रोटीन को नुकसान पहुंचाते हैं | इन्हीं नुकसान को एक्सीडेंटल स्ट्रेस कहा जाता है |
एक्सीडेंटेटिव स्ट्रेस बढ़ने से शरीर में सूजन (इन्फ्लेमेशन) बढ़ती है, दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ता है और उम्र तेजी से बढ़ने लगती है | प्रदूषण, धूम्रपान, तनाव और जंक फूड से फ्री रेडिकल्स की मात्रा और भी बढ़ जाती है |
एंटीऑक्सीडेंट-शरीर का प्राकृतिक रक्षक
एंटीऑक्सीडेंट ऐसे योगिक (compounds) होते हैं जो की फ्री रेडिकल्स को निष्क्रिय कर देते हैं और कोशिकाओं को बचाते हैं | शरीर कुछ एंटीऑक्सीडेंट खुद बनाता है, लेकिन अधिकांश हमें खाने से ही मिलते हैं | इनमें विटामिन C, विटामिन E, बीटा कैरोटीन, लाइकोपीन, सेलेनियम और पॉलिफिनॉल्स प्रमुख है |
लंदन के के किंग्स कॉलेज की एक शोध- जो प्रतिष्ठित जर्नल मेडिसिन में प्रकाशित हुई है – के अनुसार लंबे समय तक पॉलीफाइनल युक्त आहार लेने से हृदय स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार होता है |
दिल को क्यों चाहिए एंटीऑक्सीडेंट?
हृदय रोगों की शुरुआत अक्सर धमनियों (arteries) में छुपकर होती है | जब शरीर में मौजूद बुरा कोलेस्ट्रॉल (LDL) आक्सीकृत होता है, तो है धमनियों की दीवारों पर जमने लगता है और ब्लॉक बनता है | इससे रक्त प्रवाह बाधित होता है और हार्ट अटैक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है |
एंटीऑक्सीडेंट रिच फ़ूड इस पूरी प्रक्रिया को रोकते हैं | ये LDL को ऑक्सीकृत होते हैं, इन्फ्लेमेशन कम करते हैं और ब्लड वेसल्स को लचीला व स्वस्थ बनाये रखते हैं | नतीजा – दिल पर दबाव कम और जिंदगी ज्यादा |
इम्यूनिटी और एजिंग पर असर
विटामिन C और E जैसे एंटीऑक्सीडेंट संक्रमण से लड़ने वाली प्रतिरक्षा कोशिकाओं को सक्रिय और मजबूत बनाते हैं | इसलिए जो लोग रंगीन और ताजे खाद्य पदार्थ खाते हैं, वे बार-बार बीमार कम पड़ते हैं |
बुढ़ापे की सबसे बड़ी वजह है-कोशिकाओं का बार-बार ऑक्सीडेटिव डैमेज होना | एंटीऑक्सीडेंट इस डैमेज को धीमी करते हैं, जिसे त्वचा, अंग और कोशिकाएं लंबी समय तक स्वस्थ रहती हैं | यानी यानी सही खान-पान से न सिर्फ उम्र, बल्कि उम्र की रफ्तार भी काबू में रहती है |
इन्हें जरूर शामिल करें अपनी थाली में
एंटीऑक्सीडेंट के सबसे अच्छे प्राकृतिक स्त्रोत:
लाल और रंगीन फल सब्जियां- टमाटर, गाजर, पपीता (लाइकोपीन और बीटा कैरोटीन)
जामुनी और नील फल – ब्लूबेरी, जामुन, अंगूर (पॉलीफेनोल्स)
हरी पत्तीदार सब्जियां – पलक, , मेथी, ब्रोकली (विटामिन C, E और ल्यूटिन)
मेवे और बीच – अखरोट, बादाम, अलसी (विटामिन E और सेलेनियम)
मसाले – हल्दी, अदरक, लहसुन (करक्यूमिन और अन्य एंटीऑक्सीडेंट)
ग्रीन टी और डार्क चॉकलेट – पॉलीफेनोल्स का अच्छा स्रोत है
कितना खाना जरूरी?
एंटीऑक्सीडेंट की कोई एक निश्चित मात्रा तय नहीं है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि रोज कम से कम 4-5 सर्विंग ताजा फल और सब्जियां खाना पर्याप्त है | ध्यान रखें- सप्लीमेंट से ज्यादा बेहतर है प्राकृतिक खाद्य पदार्थों से एंटीऑक्सीडेंट लेना | हाइड्रोजन सप्लीमेंट्स का अधिक उपयोग कभी-कभी उल्टा असर भी डाल सकता है और शरीर की मेटाबॉलिक संतुलन को बिगाड़ सकता है |
आसान तरीके डाइट में शामिल करने की
सुबह की शुरुआत एक कटोरी मिक्स फ्रूट से करें- पपीता, अनार, सेब |
खाने में हर बार एक रंगीन सब्जी जरूर शामिल करें |
स्नेक्स चिप्स की जगह मेवे या फल लें |
चाय की जगह कभी-कभी ग्रीन टी या हर्बल टी पियें |
खाना पकाने में हल्दी, अदरक और लहसुन का उपयोग बढ़ाएं |
एंटीऑक्सीडेंट रिच डाइट कोई नया ट्रेड नहीं, यह सदियों से चली आ रही प्राकृतिक सीख है | अपनी थाली को जितना रंगीन बनाएंगे, उतना ही आपका दिल, दिमाग और शरीर स्वस्थ रहेगा | कोई महंगा डाइट प्लान नहीं, बस हर दिन थोड़ा सा बदलाव- और आप खुद फर्क महसूस करेंगे |
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