शीर्षासन करने का सबसे आसान तरीका/Easiest way to headstand

शीर्षासन के फायदे | शीर्षासन के 14 लाभों को जाने और हमेशा फिट रहें  Shirshasana Benefits 

शीर्षासन के फायदे
शीर्षासन के फायदे

1. सम्पूर्ण शरीर को स्वस्थ बनाना

यह आसन सब आसनों का राजा है | इससे आंख, कान, नाक, मस्तिष्क स्वस्थ रहते हैं  | पिट्यूटरी एवं पीनियल ग्लैंड को स्वस्थ करके मस्तिष्क को सक्रीय करता है | बुद्धि को बढाता है |

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2. पेट के रोगों को दूर करना

पाचनतंत्र, आमाशय, आंत्र एवं लीवर को स्वस्थ करता है | भूंख को बढाता है | आन्त्रव्रद्धि, आंत्रशोथ, हिस्टीरिया, हर्निया, कब्ज, वेरीकोज वेंस रोगों को दूर करता है |


3.थाइरोइड ग्रंथि को ठीक रखना 

थाइरोइड ग्लैंड को सक्रीय कर दुर्बलता और मोटापा दोनों को दूर करता है, क्योंकि थाइरोइड के अनियमित होने से दोनों रोग होते हैं | शीर्षासन थाइरोइड ग्लैंड को सक्रीय करके ब्रम्हाचर्य को स्थिर करता है | स्वप्नदोष, प्रमेह, नपुंसकता, बंध्यापन, आदि व्याधियों को ठीक करता है | मुखमंडल पर ओज एवं तेज की वृद्धि करता है |


4.
मस्तिष्क में रक्तसंचार को बढ़ाना 

यह आसन स्मरण शक्ति को बढाता  है | पूरे शरीर के तंत्रिका तंत्र को स्वस्थ रखता है | गले में खराश होनालीवर कमजोर होना (यकृत), तिल्ली बिगड़ जाना, चर्मरोग होना, बालों का गिरना आदि रोगों में अत्यंत लाभकारी है |

5.तनाव को दूर करता है  

हेट स्टैंड एक कूलिंग पोजीशन है क्योंकि यह अपना ध्यान भीतर केंद्रित करने में सहायक होता है | आप शीर्षासन की लंबी स्थिर सांस के साथ जोड़ते हैं तो आपको सूक्ष्म स्तर पर राहत देकर तनाव दूर करता है ।

6.आंखों के लिए शीर्षासन के फायदे 

यह आसन करने पर आपके सिर तक अधिक ऑक्सीजन और पोषक  तत्व से भरपूर रक्त पहुंचता है | जिसका मतलब यह है कि आंख तक अच्छी ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंच रहा है | यह मस्कुलर डीजनरेशन और अन्य दृष्टि समस्याओं की रोकथाम में सहायता करता है ।

7.बालों के लिए शीर्षासन के फायदे 

यह आसन खोपड़ी में ऑक्सीजन और पोषक तत्व की प्रचुर आपूर्ति के साथ रक्त परिसंचरण को बढ़ावा मिलता है जिसके परिणाम स्वरुप है बेहतर बाल आते हैं ।

8.कोर मसल्स को मजबूत बनाने के लिए शीर्षासन

यह योग कोर मसल्स को मजबूत बनाने में बहुत सहायक होता है | यह पूरे आसन के दौरान अपने पैरों को ऊपर रखने और अपना संतुलन बनाए रखने के लिए ,बहुत सारी मुख्य गतिविधियां चलती रहती हैं जिससे कोर मजबूत होती है ।

9.यौन विकारों में मदद करता है 

हैंड स्टैंड योग के लाभ में प्रोस्टेट समस्याओं, हाइड्रोसिल, ल्यूकोरिया, शुक्राणु जनन, और मासिक धर्म संबंधित अनियमितताओं से दूर करता है । यह योगासन यौन अंतः स्रावी  ग्रंथियों, अंगों के रक्त प्रवाह में सुधार करता है।

10.बेहतर फोकस  के लिए

जब आप उल्टे हो जाते हैं तो आपके मस्तिष्क में रक्त की आपूर्ति बढ़ जाती है या मस्तिष्क की कार्य क्षमता को बढ़ाकर आपको बेहतर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।

11.हड्डियों को मजबूत बनाना 

यह आसन हड्डियों के स्वास्थ्य में सुधार  करता है | प्रायः वजन उठाने वाले व्यायाम हड्डियों के स्वास्थ्य में सुधार करते हैं | शीर्षासन को वजन उठाने वाला व्यायाम माना जाता है क्योंकि आप अपनी बाहों से अपना पूरा वजन संभाल रहे होते हैं।

12.सुकून भरी नींद लाना

शीर्षासन रक्त संचार को बेहतर बनाता है बेहतर रक्त प्रवाह से दिमाग शांत और तनावमुक्त रखता है । इससे गहरी नींद लाने में सुधार करता है। कई बार ऑक्सीजन की कमी से तनाव, चंचलता हो जाती है | शीर्षासन से मस्तिष्क में ऑक्सीजन की मात्रा भरपूर पहुंचती है और रक्त संचार भी भरपूर होता है जिससे सिर दर्द भी दूर हो जाता है |

13.सर्दी और खांसी को दूर करना

शीर्षासन के लाभ में पूरे शरीर को फिट, जीवंत और ऊर्जावान बनाना रक्त प्रभाव को बढ़ावा देना आपके साइनस की रक्षा करना खांसी और कंजेशन के लक्षणों को खत्म करना शामिल  है। सर्दी के शुरुआत में न करें  इसे 3 से चार दिन बाद करें | जिनके नाक बहती रहती है, कफ भरा रहता है | इसे करने से कफ निकल जाता है |

14.कंधों और भुजाओं को मजबूत बनान  

शीर्षासन करते समय अपनी अग्रभुजाओं को जमीन पर धकेलते हैं अपने सिर और गर्दन पर दबाव को दूर रखने के लिए अपनी भुजाओ और कंधो  के पीठ की ताकत का उपयोग करते हैं इस प्रकार से भुजाओं और कंधों में मजबूती मिलती है।

शीर्षासन करने का सबसे आसान तरीका

1.पंजों के बल बैठकर घुटनों को जमीन पर लगा लें | 

2.दोनों हांथों की अँगुलियां एक दुसरे में फंसा लीजिये 

3.दोनों कोहनियों तथा फंसे हुए पंजों से एक त्रिकोण सा बनाते हुए उसे जमीन पर रखिये |

4.पैरों को सीधा करें | धीरे-धीरे दोनों पैरों को शरीर के पास ले आयें |

5.इससे पंजे जमीन से उठ जायेंगे, अब पैर सीधे करें घुटने न मोड़ें |

6.घुटने सीधे कर लें और सिर के बल खड़े हो जाएँ |

शीर्षासन का समय

यह आसन 15 सेकेण्ड से आरंभ करके आधे घंटे तक कर सकते हैं | सामान्य अवस्था में 5 से 10 मिनट तक पर्याप्त है |

ध्यान रखेंदोनों हाथों का ग्रिप  बनाकर  मेट पर रखें, आधा सिर मेट पर आधा हांथों की उँगलियों के ऊपर | झटके से पैर न उठायें, धीरे-धीरे एक पैर फिर दूसरा पैर उठाकर अभ्यास करें | वापस  आते समय लेंडिंग एक पैर, फिर दूसरा पैर नीचे  रखें |

शीर्षासन की सावधानियां

जिन्हें उच्चरक्तचाप, कान बहना, ह्रदय रोग हो, खासी हो, बिगड़ा  जुखाम हो वे इसे न करें तथा बध्यकोष्ठता में ध्यान से करें | सर्वाइकल – गर्दन या पीठ में दर्द होने पर इसे न करें | 

शीर्षासन का वीडियो  | Shirshasana Video

 

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